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बिहार पुलिस में बड़ा फेरबदल: 50 से अधिक DSP का तबादला, साइबर क्राइम और आर्थिक अपराध इकाई को मिली नई मजबूती

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बिहार सरकार ने पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 50 से अधिक डीएसपी और समकक्ष अधिकारियों का तबादला किया है। कई अधिकारियों को साइबर क्राइम, आर्थिक अपराध इकाई और CID में नई जिम्मेदारी दी गई है।

बिहार/आलम की खबर:बिहार सरकार के गृह विभाग ने पुलिस प्रशासन में बड़ा बदलाव करते हुए डीएसपी और समकक्ष स्तर के 50 से अधिक अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इस संबंध में गृह विभाग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें सभी अधिकारियों को उनके नए पदस्थापन स्थलों पर तत्काल योगदान देने का निर्देश दिया गया है। इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल को राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने तथा पुलिसिंग सिस्टम में कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जारी सूची के अनुसार कई अधिकारियों को आर्थिक अपराध इकाई (EOU), अपराध अनुसंधान विभाग (CID), साइबर क्राइम सेल, विशेष सशस्त्र पुलिस (SAP) और यातायात शाखा जैसी अहम इकाइयों में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही कई प्रशिक्षु और परिवीक्षाधीन पुलिस उपाधीक्षकों का भी अलग-अलग जिलों और विशेष शाखाओं में स्थानांतरण किया गया है। प्रशासन का यह कदम बदलते अपराध के स्वरूप, विशेषकर साइबर फ्रॉड और आर्थिक अपराधों पर नियंत्रण की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

अधिसूचना के अनुसार सहायक पुलिस महानिरीक्षक रेल, पटना में पदस्थापित अंजली अरोसी को अब सहायक पुलिस महानिरीक्षक यातायात, बिहार पटना की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं रोहतास में पदस्थापित अशफाक अंसारी को मद्य निषेध एवं राज्य उत्पाद नियंत्रण ब्यूरो में नई पोस्टिंग मिली है। इसी तरह मनोज राम, जो वैशाली में पदस्थापित थे, उन्हें अपराध अनुसंधान विभाग (CID), पटना भेजा गया है। इन बदलावों को प्रशासनिक संतुलन और विभागीय दक्षता बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है।

सूची में कई महिला अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। वंदना कुमारी को मद्य निषेध एवं राज्य उत्पाद नियंत्रण ब्यूरो में अपर पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। प्रिय ज्योति को साइबर क्राइम नवादा से केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण केंद्र, डुमरांव भेजा गया है। वहीं सुषमा कुमारी को CID पटना से साइबर क्राइम सोनभद्र में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे स्पष्ट है कि पुलिस प्रशासन में महिला अधिकारियों की भूमिका को भी लगातार विस्तार दिया जा रहा है।

गृह विभाग के आदेश में आर्थिक अपराध इकाई को विशेष रूप से मजबूत करने पर जोर दिया गया है। मुकेश चौधरी, दिलीप कृष्ण, आशीष कुमार, संजय कुमार झा, विजय कुमार गुप्ता, सुनील कुमार और विनोद कुमार जायसवाल सहित कई अधिकारियों को EOU या उससे संबंधित शाखाओं में तैनात किया गया है। यह कदम राज्य में बढ़ते वित्तीय अपराध, ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड जैसे मामलों पर सख्त नियंत्रण की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

इसके अलावा अपराध अनुसंधान विभाग (CID) में भी कई महत्वपूर्ण पदस्थापन किए गए हैं। मंजू कुमारी, राजेश कुमार, रजनीश कुमार और मनीष कुमार सिंह सहित कई अधिकारियों को विभिन्न जांच इकाइयों और विशेष शाखाओं में जिम्मेदारी दी गई है। इससे आपराधिक मामलों की जांच प्रक्रिया को और मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।

यातायात और प्रशिक्षण इकाइयों में भी कई अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है। आशीष कुमार सिंह को गया से यातायात, पटना भेजा गया है, जबकि उमेश लाल रजक को बेगूसराय से भागलपुर में पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित) बनाया गया है। वहीं रवि भूषण को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-2, डेहरी में नई जिम्मेदारी मिली है। इससे राज्य में पुलिस बल के संचालन और प्रशिक्षण व्यवस्था को नया स्वरूप देने की कोशिश की गई है।

परिवीक्षाधीन डीएसपी अधिकारियों में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। शाहनवाज अख्तर को रोहतास से साइबर क्राइम नवादा, अब्दुर रहमान दानिश को सारण से साइबर क्राइम गया और अभिषेक कुमार को औरंगाबाद से मुंबई साइबर क्राइम प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि बिहार पुलिस साइबर अपराध नियंत्रण को लेकर अपने अधिकारियों को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण दिलाने पर विशेष जोर दे रही है।

अधिसूचना में यह भी उल्लेख किया गया है कि गया में पदस्थापित अपर पुलिस अधीक्षक नरेंद्र कुमार सिंह का पद समाप्त कर दिया गया है और उन्हें अगले आदेश तक प्रतीक्षारत रखा गया है।

गृह विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नए पदस्थापन स्थल पर योगदान देने का निर्देश दिया है। साथ ही पुलिस महानिदेशक को आदेश के अनुपालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कुल मिलाकर बिहार पुलिस में किया गया यह बड़ा प्रशासनिक फेरबदल राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, साइबर अपराध पर नियंत्रण बढ़ाने और आर्थिक अपराध इकाई को और अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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